हॉलीवुड में भारत का प्रतिनिधि करते निर्माता अशोक अमृतराज

टेनिस से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले अशोक अमृतराज ने हॉलीवुड में एक निर्माता के रूप में वह मुकाम हासिल किया जो कि अमरीकी मूल के लोगों को भी नहीं हासिल होता। 


लम्बा कद, सांवला रंग, मोटे बाल और भारतीय होने की पहचान। इस पहचान के साथ श्वेतों की दुनिया में कोई मुकाम हासिल करना एक टेढ़ी खीर है। परन्तु यदि हौंसले बुलंद हो और दिल में कुछ करने की चाहत हो तो कोई मुकाम हासिल करना इंसान के बस के बहार की बात नहीं है। इसी हौंसले के साथ भारत के एक टेनिस खिलाडी अशोक अमृतराज ने वर्षों पहले यह निश्चय किया कि वह अमरीकी फिल्म जगत के मक्के 'हॉलीवुड' में फिल्मों के निर्माता बनेंगे। टेनिस का अच्छा कॅरियर छोड़ अशोक ने हॉलीवुड के स्टूडियो का रुख किया। एक टेनिस खिलाडी की बहुचर्चित छवि से उठ कर स्वयं को एक ऐसे निर्माता के रूप में स्थापित किया जिसके पीछे हॉलीवुड के वह स्टूडियो भी भागने लगे जिनके पीछे दुनिया भागती है। और फिर एक दिन खाड़ी देशों के अमीर सौदागरों ने भी अशोक के लिए अपने खजाने खोल दिए और उसे फिल्म निर्माण के लिए खूब धन दिया। पर कामयाबी का यह सफर आसान नहीं था। 
अशोक अमृतराज
अपने तीन भाईयों में सबसे छोटे अशोक का कैरियर एक टेनिस खिलाडी के रूप में बहुत अच्छा चल रहा था। हालाँकि अशोक को टेनिस उतना प्रिय नहीं था।  अपने आई. ए. एस. अफसर पिता और व्यवसायी माता से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। शिक्षा और कड़ा अनुशासन हमेशा उनके जीवन के अभिन्न अंग रहे। जब वह छोटे थे तो उनकी माता उन्हें उनके भाईयों के साथ दौड़ पर भेजा करती और यदि उनकी माता को पता चलता कि बच्चे दौड़े नहीं तो वह उनके साथ-साथ उनके पीछे अपनी कर लेकर जाती और देखती कि बच्चे दौड़े।  उनकी माँ का मानना था कि उनके बच्चों के नाना चाहते थे कि बच्चे एक दिन टेनिस खिलाडी बनें। फिर एक दिन ऐसा आया कि अशोक और उनके और दोनों भाईयों ने भी टेनिस की दुनिया में धूम मचा कर भारत का विश्व में नाम किया। और दो भाईयों विजय और आनंद को अपने टेनिस के कैरियर में बहुत आनंद आता। पर अशोक तो कुछ और ही चाहते थे। 
अशोक जेन क्लाड वेन डेम के साथ
टेनिस को जल्दी ही अलविदा कह अशोक ने हॉलीवुड की रुख ली। शुरुआत में एक भाई और एक मित्र ने धन से मदद की पर फिर उन्होंने भी अधिक साथ नहीं दिया। अशोक झूझते रहे। उनकी टेनिस खिलाड़ी की इमेज ही लोगों के दिमागों पर अधिक हावी रही। वह हॉलीवुड में खुद को एक निर्माता के रूप में स्थापित करना चाहते थे पर लोग उनको एक टेनिस खिलाडी के रूप में ही देखते थे। पर अशोक अपने मकसद से नहीं हटे। उन्होंने टेनिस का रेकेट छोड़ दिया था। वह तो अब फिल्म निर्माण के बारे में और अधिक जानना चाहते थे। टेनिस के कोर्ट की जगह अब हॉलीवुड के स्टूडियों ने ले ली थी। अब अशोक फिल्म निर्माण से सम्बंधित चीज़े समझने लगे। कुछ फिल्में बनाई पर बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी। विवाह भी नहीं हुआ था। माँ उनके विवाह के लिए तत्पर थी। पर अशोक को शायद किसी बड़ी कामयाबी की तलाश थी। 
अशोक अपनी पत्नी चित्रा, पुत्री प्रिया और पुत्र मिलिन के साथ 
दस वर्ष बीत गए। एक दिन कांस फिल्म समारोह में अशोक की मुलाकात एक उभरते हुए एक्टर से हुई। उस एक्टर ने उन्हें याद दिलाया कि जब वह अभिनय में कैरियर बनाने के लिए अपनी फोटो लोगों को भेजा करता था तब मात्र अशोक ही ऐसे थे जिसने कि उसका जवाब दिया था। कल का वह संघर्ष करनेवाला एक्टर आज का स्टार बन चुका था और कुछ बड़ी फ़िल्में करनेवाला था। अशोक और उस एक्टर में मित्रता हो गई और उसने अशोक के साथ फिल्म करने का वादा किया। दोनों ने मिल कर 'डबल इम्पेक्ट' नाम की फिल्म बनाई जो कि दुनियाभर में सफल रही। अशोक और उस एक्टर, जॉन क्लाड वेन डेम, की जोड़ी ने और भी फिल्में बनाई। अशोक को वह सफलता मिली जिसकी उसे तलाश थी। डबल इम्पेक्ट के बनते-बनते अशोक को अपनी जीवन संगनी भी मिल गई।  उनका भारत में रहनेवाली चित्रा से विवाह हो गया और वह भी उनके साथ अमरीका जा कर रहने लगी। अशोक को एक के बाद दूसरी सफलता मिलती गई। 

जिस सपने को कभी अशोक ने देखा था वह अब पूरा हो चूका था। हॉलीवुड के स्टूडियों ने अशोक को उनकी फिल्मों के निर्माण के लिए अनुबंधित किया। इधर भारत में भी अशोक ने 'जींस' नमक एक फिल्म का निर्माण किया जिससे अभिनेत्री ऐश्वर्या राय ने अपने कैरियर की शुरूआात की। जींस भी व्यावसायिक रूप से एक बड़ी सफल फिल्म रही। अशोक एक के बाद एक सफलता हासिल कर रहे थे। फिर एक दिन ऐसा मुकाम आया जिसका सपना शायद ही कोई देखता है।  अशोक हॉलीवुड में सौ फिल्मों के निर्माण करनेवाले निर्माताओं की श्रेणी में आ गए। सौ फिल्मों का निर्माण और वह भी इतने काम समय में और वह भी एक भारतीय मूल के व्यक्ति द्वारा एक असंभव का लक्ष्य है जिसे अशोक ने हासिल किया। अशोक भारत के सांस्कृतिक दूत बने। न केवल वह हॉलीवुड में ही लोकप्रिय हुए बल्कि भारत में भी उनके बहुत से मित्र बने। उन्होंने भारत के फिल्मकारों और कलाकरों का भी हमेशा दिल खोल कर स्वागत किया। जब कभी उन्हें समय मिला उन्होंने भारत में टी. वी. के लिए भी अपनी सेवाएं दी। अशोक भारत से हॉलीवुड में एक ऐसा सितारा बन कर चमके जैसा भारत के सम्राट  धम्म अशोक ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व राज शासन में चमके थे। अशोक अमृतराज का नाम टेनिस खिलाडी से हट कर एक फिल्म निर्माता के नाम से जाना जाने लगा। 
अशोक अपने भाइयों विजय और आनंद के साथ (21 नवम्बर 1978)
और फिर एक दिन ऐसा आया कि अशोक के लिए खाड़ी के धन कुबेरों ने अपने खजाने खोल दिए। अपने फिल्म निर्माता के कैरियर ke प्रारम्भ के दस वर्षों में संघर्ष करने वाले अशोक के पास धन की कोई कमी नहीं रही। अब उन्होंने हॉलीवुड के बड़े से बड़े सितारों के साथ काम किया। उनके द्वारा निर्मित निकोलस केज के अभिनय वाली फिल्म "घोस्ट राइडर्स" तो अक्सर भारत में टी. वी. पर आती रहती है। अशोक की प्रतिष्ठा बढ़ती ही चली गई। सिंगापुर की सरकार ने एक फिल्म समारोह के दौरान अपनी सड़कों पर अशोक की फोटो वाले बड़े-बड़े बैनर लगा कर उनका सम्मान किया। अशोक के लिए यह जीवन के सबसे सुखद पलों में से एक है। पिछले वर्ष अशोक ने भारत में दूरदर्शन के लिए भी एक कार्यक्रम को अपनी सेवाएं दी थी। अशोक का देशप्रेम भी अछूता नहीं रहा है और उन्होंने स्वयं को हॉलीवुड में भारत के एक सांस्कृतिक दूत के रूप में देखा है। आज अशोक अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अमरीका में रहते हैं। एक भाई, पुत्र, पति, पिता और व्यवसायी आदि के सभी रूपों में अशोक ने अपनी बुद्धिमत्ता और विवेकशीलता का परिचय दिया है। अपने जीवन को उन्होंने अपनी जीवनी 'हॉलीवुड एडवेंटेज' में उतरा जो कि किसी के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत हैं। आज भी अशोक शायद कुछ और नए सपने देख रहे हैं जैसा कि वह बचपन में देखा करते थे। शायद उन सपनों में वह खुद को वैसे ही खोते हुए देखना चाहते हों जैसा कि वह बचपन में फिल्में देखते हुए खो जाते थे। भारत के लिए अशोक एक गर्व की पहचान है। मेरा भारत सरकार से यह अनुरोध है कि वह अशोक का एक म्यूज़ियम (साथ में फिल्म स्कूल) निर्माण करे जहाँ उनकी फिल्मों के शो भी हों और जिससे भारत की आनेवाली संतानों को प्रेरणा मिलती रहे कि वह भी अशोक की तरह बड़े सपने देखें, मुश्किल लक्ष्यों को हासिल करें और अपने देश को गौर्वान्तित करें।  - निखिल सबलानिया 

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