फिल्म निर्माता निखिल सबलानिया लघु बजट फिल्मों की श्रृंखला ले कर आ रहे हैं जिनमें कम निवेश करके भी फिल्म निर्माण से जुड़ सकते हैं।
आज के डिजिटल युग ने फिल्मों को न सिर्फ सर्वसुलभ ही बनाया है बल्कि फिल्म व्यवसाय से जुड़ने वालों के लिए भी नए अवसर खोल दिए हैं। ऐसे में अब मौका है कि आप कम निवेश से भी इस व्यवसाय में प्रवेश कर सकते हैं। ऐसा ही एक मौका आपको दे रहे हैं निखिल सबलानिया।
बचपन से ही कहानियां सुनने, पढ़ने और कॉमिक व लघु नॉवल पढ़ने के शौक़ीन एक किशोर ने नौवीं कक्षा में अपनी पहली फिल्म की कहानी लिखी। आगे चल कर उसने थियेटर, लेखन और फिल्म निर्माण में शिक्षा ले कर मुंबई में फिल्म और टीवी के क्षेत्र में कार्य प्रारम्भ किया और अठाइस वर्ष की उम्र में अपनी पहली फीचर फिल्म का निर्माण किया। साथ ही लघु फिल्म, डॉक्यूमेंट्री फिल्म और कॉर्पोरेट फिल्मों का निर्माण भी किया। पर व्यवसाय में क़ानूनी बारीकियां होती है इसलिए उसने क़ानूनी शिक्षा भी ली। लोगों में प्रचलित होते नए वीडियों मीडियम के लिए भी अनेक प्रकार के ऑडियो व वीडियो का निर्माण किया। और अब नौवीं कक्षा में अपनी पहली फिल्म की कहानी लिखने वाला छात्र, बयालीस वर्ष का हो चुका है और अपने इन सत्ताईस वर्षों के सफर के बाद कई फिल्मों का निर्माण करने जा रहा है।
निखिल सबलानिया ने अपनी फिल्मों की शिक्षा भारतीय सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्रारा संचालित सत्यजीत राय फिल्म और टेलीविज़न संसथान, कोलकाता से वर्ष 2003 - 2007 में पूरी की। इससे पहले 1998 से 2003 तक, यासीन खान और मधुमिता खान द्वारा संचालित इंदु आर्ट्स एन्ड थियेटर फिल्म सोसाइटी व जलबाला वैद्य और गोपाल शर्मन द्वारा संचालित अक्षर थियेटर में मूल ट्रेनिंग ली और थियेटर युनिट पटना द्वारा दिल्ली में प्रकाश बंधु द्वारा संचालित थियेटर युनिट दिल्ली के साथ वर्ष 1999 में रंगमंच नाटक का निर्माण किया। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध की त्रासदी पर उनके द्वारा निर्मित नाटक 'शहीद' दिल्ली में विभिन्न संस्थाओं में प्रस्तुत किया गया। दिल्ली विश्वविधालय के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से मनोविज्ञान में स्नातक और दिल्ली विश्वविधालय के ही फेकल्टी ऑफ लॉ से विधि की शिक्षा ली। 2007 से मुंबई में फिल्म व टीवी से जुड़ गए और निर्माण के कार्य शुरू किए। फिल्म निर्माण में वह इसी क्षेत्र में शिक्षा भी देते हैं। फिल्म स्क्रिप्ट लेखन पर उन्होंने हिंदी और इंग्लिश में अपने द्वारा दी गई ऑनलाइन कक्षाओं को यूटयूब पर डाल कर नई पीढ़ी के लिए यह शिक्षा सुलभ कराई है। दो फिल्म स्कूलों में भी वह सञ्चालन और शिक्षण करते हैं। भारत और विदेश के कई फिल्म कलाकारों के साथ वे काम कर चुके हैं।
अपनी शिक्षा और अनुभव को विस्तृत आकर देने के लिए अब वह कई फिल्मों के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। वैसे तो फिल्मों का निर्माण बहुत महंगा पड़ता है पर वह अपनी शिक्षा और अनुभव से वह कम बजट में निर्माण करने की क़ाबलियत रखते हैं। उनके द्वारा तैयार किए जा रहे फिल्मों के प्रोजेक्ट्स हिंदी भाषा के साथ-साथ भारत की कई अन्य भाषाओँ में भी हैं जिनमें अधिकांश्तर कर्मी उन राज्यों की फिल्म इंडस्ट्री से हैं जिन राज्यों में वह भाषा बोली जाती है। कई फ़िल्में नए कलाकारों के लांच के लिए भी हैं। जो लोग फिल्म अभिनय (एक्टिंग) या किसी अन्य क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं वे छोटे से निवेश से प्रवेश कर सकते हैं। जरूरत होगा तो प्रोजेक्ट्स से पहले उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
फिल्मों के प्रोजेक्ट्स के बारे में और उनसे जुड़े व्यवसाय के बारे में और समझने के लिए आप इस लिंक (https://shortest.link/1syV) पर जा कर अपना परिचय, उद्देश्य और उपलब्ध निवेश का विवरण भर सकते हैं। सिर्फ वे ही लोग या संस्थाए भरें जो इसमें रूचि रखने के निवेश करने के लिए भी तैयार हैं। व्यर्थ में भरने वालों को सदा के लिए रिजेक्टिड कर दिया जाएगा इसलिए पहले समय लेकर सोच समझ कर ही भरें। फिरआपको उनके कार्यालय द्वारा सम्पर्क करके इन प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी दे दी जाएगी। तो यदि फिल्में आपका सपना है और आपको सही दिशा या ट्रेनिंग चाहिए और आप साथ ही निवेश कर सकते हैं तो यह मौका है आपके लिए।
बचपन से ही कहानियां सुनने, पढ़ने और कॉमिक व लघु नॉवल पढ़ने के शौक़ीन एक किशोर ने नौवीं कक्षा में अपनी पहली फिल्म की कहानी लिखी। आगे चल कर उसने थियेटर, लेखन और फिल्म निर्माण में शिक्षा ले कर मुंबई में फिल्म और टीवी के क्षेत्र में कार्य प्रारम्भ किया और अठाइस वर्ष की उम्र में अपनी पहली फीचर फिल्म का निर्माण किया। साथ ही लघु फिल्म, डॉक्यूमेंट्री फिल्म और कॉर्पोरेट फिल्मों का निर्माण भी किया। पर व्यवसाय में क़ानूनी बारीकियां होती है इसलिए उसने क़ानूनी शिक्षा भी ली। लोगों में प्रचलित होते नए वीडियों मीडियम के लिए भी अनेक प्रकार के ऑडियो व वीडियो का निर्माण किया। और अब नौवीं कक्षा में अपनी पहली फिल्म की कहानी लिखने वाला छात्र, बयालीस वर्ष का हो चुका है और अपने इन सत्ताईस वर्षों के सफर के बाद कई फिल्मों का निर्माण करने जा रहा है।
निखिल सबलानिया ने अपनी फिल्मों की शिक्षा भारतीय सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्रारा संचालित सत्यजीत राय फिल्म और टेलीविज़न संसथान, कोलकाता से वर्ष 2003 - 2007 में पूरी की। इससे पहले 1998 से 2003 तक, यासीन खान और मधुमिता खान द्वारा संचालित इंदु आर्ट्स एन्ड थियेटर फिल्म सोसाइटी व जलबाला वैद्य और गोपाल शर्मन द्वारा संचालित अक्षर थियेटर में मूल ट्रेनिंग ली और थियेटर युनिट पटना द्वारा दिल्ली में प्रकाश बंधु द्वारा संचालित थियेटर युनिट दिल्ली के साथ वर्ष 1999 में रंगमंच नाटक का निर्माण किया। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध की त्रासदी पर उनके द्वारा निर्मित नाटक 'शहीद' दिल्ली में विभिन्न संस्थाओं में प्रस्तुत किया गया। दिल्ली विश्वविधालय के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से मनोविज्ञान में स्नातक और दिल्ली विश्वविधालय के ही फेकल्टी ऑफ लॉ से विधि की शिक्षा ली। 2007 से मुंबई में फिल्म व टीवी से जुड़ गए और निर्माण के कार्य शुरू किए। फिल्म निर्माण में वह इसी क्षेत्र में शिक्षा भी देते हैं। फिल्म स्क्रिप्ट लेखन पर उन्होंने हिंदी और इंग्लिश में अपने द्वारा दी गई ऑनलाइन कक्षाओं को यूटयूब पर डाल कर नई पीढ़ी के लिए यह शिक्षा सुलभ कराई है। दो फिल्म स्कूलों में भी वह सञ्चालन और शिक्षण करते हैं। भारत और विदेश के कई फिल्म कलाकारों के साथ वे काम कर चुके हैं।
अपनी शिक्षा और अनुभव को विस्तृत आकर देने के लिए अब वह कई फिल्मों के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। वैसे तो फिल्मों का निर्माण बहुत महंगा पड़ता है पर वह अपनी शिक्षा और अनुभव से वह कम बजट में निर्माण करने की क़ाबलियत रखते हैं। उनके द्वारा तैयार किए जा रहे फिल्मों के प्रोजेक्ट्स हिंदी भाषा के साथ-साथ भारत की कई अन्य भाषाओँ में भी हैं जिनमें अधिकांश्तर कर्मी उन राज्यों की फिल्म इंडस्ट्री से हैं जिन राज्यों में वह भाषा बोली जाती है। कई फ़िल्में नए कलाकारों के लांच के लिए भी हैं। जो लोग फिल्म अभिनय (एक्टिंग) या किसी अन्य क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं वे छोटे से निवेश से प्रवेश कर सकते हैं। जरूरत होगा तो प्रोजेक्ट्स से पहले उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
फिल्मों के प्रोजेक्ट्स के बारे में और उनसे जुड़े व्यवसाय के बारे में और समझने के लिए आप इस लिंक (https://shortest.link/1syV) पर जा कर अपना परिचय, उद्देश्य और उपलब्ध निवेश का विवरण भर सकते हैं। सिर्फ वे ही लोग या संस्थाए भरें जो इसमें रूचि रखने के निवेश करने के लिए भी तैयार हैं। व्यर्थ में भरने वालों को सदा के लिए रिजेक्टिड कर दिया जाएगा इसलिए पहले समय लेकर सोच समझ कर ही भरें। फिरआपको उनके कार्यालय द्वारा सम्पर्क करके इन प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी दे दी जाएगी। तो यदि फिल्में आपका सपना है और आपको सही दिशा या ट्रेनिंग चाहिए और आप साथ ही निवेश कर सकते हैं तो यह मौका है आपके लिए।

V nice ,, specialy good movies in v low budget
ReplyDeleteNikhil ji ur thought in डिजिटल सिनेमा इस very good
ReplyDeletemy no8290696614 I am Amit sabalaniya
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